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सितारा देवी की जन्म शताब्दी पर कत्थक नृत्यांगनाओंं ने दी श्रद्धांजलि

कुमार राहुल/सीवान:- शहर के महादेवा स्थित शिवादि क्लासिक सेंटर ऑफ आर्ट एंड म्यूजिक में पद्मभूषण कत्थक क्वीन सितारा देवी की जन्म शताब्दी के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर कत्थक नृत्यांगनाओंं ने कत्थक क्वीन सितारा देवी को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की शुरुआत में नवोदित नृत्यांगनाओं ने सितारा देवी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए आलेख पाठ किया।

सितारा देवी की जीवन पर प्रकाश डालती प्रज्ञा द्विवेदी

कत्थक नृत्यांगना प्रज्ञा द्विवेदी ने कहा कि कत्थक क्वीन सितारा देवी नृत्य के आकाश में नक्षत्र की भांति आज भी जगमगा रही हैं। नृत्यांगना पुष्पांजलि ने कहा कि सितारा देवी को रविन्द्र नाथ टैगोर जी ने कत्थक क्वीन की उपाधि से अलंकृत किया था। वहीं नृत्यांगना तनु कुमारी ने कहा कि बतौर महिला कलाकार सितारा देवी ने कत्थक को लोकप्रिय बनाने के लिए बहुत संघर्ष किया।

घूंघट की मुद्रा में नृत्यांगना रश्मि और सृष्टि

बॉलीवुड की कई मशहूर अदाकारा को सितारा देवी ने नृत्य सिखाया है जिनमे, मधुबाला जी, माला सिन्हा, रेखा जी व काजोल का नाम उल्लेखनीय है। और कई चर्चित फिल्मों में इन्होंने काम किया है। इस अवसर पर कथक नृत्यांगना सृष्टि प्रिया और रश्मि श्रीवास्तव ने युगल कथक प्रस्तुत करते हुए शिव वंदना, उपज, थाट, आमद, टुकड़े, परण व ठुमरी प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच संचालन व धन्यवाद ज्ञापन संस्था की निदेशिका आदित्या श्रीवास्तव ने किया।

मशहूर कथक नृत्यांगना सितारा देवी का जीवन परिचय

कत्थक क्वीन सितारा देवी

मशहूर कत्थक नृत्यांगना सितारा देवी का जन्म आठ नवंबर 1920 को कोलकाता में हुआ था। उनके बचपन का नाम धनलक्ष्मी था। उन्हें प्यार से लोग धन्नो बुलाते थे। सितारा देवी की कामयाबी के पीछे एक लंबा संघर्ष रहा। उनके जन्म दिवस के मौके पर हम आपको उनसे जुड़े कुछ अनसुने किस्सों से रूबरू कराते हैं।

16 साल की उम्र में ही सितारा देवी को ‘नृत्य सम्रागिनी’ का खिताब मिल गया था। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें यह नाम दिया था। सितारा देवी के पिता सुखदेव महाराज भी एक कथक डांसर थे। साथ ही वे संस्कृत भाषा के भी बड़े विद्वान माने जाते थे। सुखदेव महाराज ने ही अपनी बेटी को नृत्य सिखाया। हालांकि समाज में इस वजह से उनकी काफी आलोचना भी हुई।

कम उम्र से ही नृत्य की शिक्षा लेने वालीं सितारा देवी ने महज 10 साल की उम्र में सोलो परफॉर्मेंस दिया। जब वह मुंबई पहुंचीं तो उन्होंने आतिया बेगम पैलेस में कथक की प्रस्तुति दी थी। इस कार्यक्रम में रवींद्रनाथ टैगोर, सरोजनी नायडू और पारसी परोपकारी सर कोवाजसी जहांगीर जैसे दिग्गज शामिल थे। सितारा देवी ने हिंदी सिनेमा में भी नृत्य किया। उनकी मुख्य फिल्मों में ‘औरत का दिल’, ‘नगीना’, ‘रोटी’ और ‘वतन’ हैं।   

कला और नृत्य में सितारा देवी के योगदान को देखते हुए 1969 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड, 1973 में पद्मश्री, 1995 में कालीदास सम्मान मिला। उन्होंने पद्म भूषण पुरस्कार लेने से मना कर दिया था और कहा था कि ‘यह सम्मान नहीं अपमान है। क्या सरकार को कत्थक में मेरे योगदान के बारे में पता है?’ सितारा देवी ने कहा था कि वे भारत रत्न से कम कोई पुरस्कार नहीं लेंगी।

सितारा देवी ने बॉलीवुड अभिनेत्रियों मधुबाला, रेखा, माला सिन्हा और काजोल को कत्थक सिखाया। भारत के अलावा सितारा देवी ने विदेश में भी अपने नृत्य का जादू बिखेरा। सितारा देवी की तीन शादियां हुईं। तीसरी शादी से उनको एक बेटा हुआ जिसका नाम रंजीत बरोट है। 25 दिसंबर 2014 को लंबी बीमारी के बाद मुंबई में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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