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सीवान में दो डॉक्टरों के दम पर चल रहा है यह कैसा मॉडल अस्पताल?

अमित/सिवान : पिछले लोकसभा चुनाव में सिवान में विकास के क्षेत्र में दरौंदा मॉडल की चर्चा तत्कालीन दरौंदा की विधायिका कविता सिंह के मुख से तो अपने सुना ही होगा। दरौंदा विकास मॉडल में वर्तमान जदयू सांसद कविता सिंह द्वारा विधायिका रहते हुए दरौंदा में कराए गए विकास कार्यों की खूब चर्चा हुई थी। इसी दरौंदा मॉडल में हसनपुरा प्रखंड के जलालपुर गांव में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) भी था । इस PHC में 14 पंचायतों के लोग इलाज कराने पहुंचते है। इस स्वास्थ्य केंद्र की इमारते देख कर तो ऐसा लगता है कि वाकई में यह काफी बेहतरीन अस्पताल होगा लेकिन जब अस्पताल के प्रबंधन और वहाँ की व्यवस्था की पड़ताल की गई तो वहाँ से कई चौकाने वाले खुलासे हुए।

ओपीडी

लाखों लोग जिस अस्पताल में अपना इलाज कराने के लिए आश्रित है उसमें केवल दो एमबीबीएस डॉक्टर तैनात हैं। जो नेत्र और दंत रोग विशेषज्ञ है। अस्पताल की स्वास्थ्य प्रबंधक पुष्पा से जब अस्पताल प्रबंधन और व्यवस्थाओं के बारे में बात की गई तो अस्पताल के कुव्यवस्था की पोल खुल गयी। उन्होंने बताया कि अस्पताल में डॉक्टरों की घोर कमी है केवल दो डॉक्टर अस्पताल में तैनात हैं जिसके कारण केवल सामान्य रोगों से पीड़ित रोगियों का ही इलाज यहाँ संभव हो पाता है। जब कोई विशेष रोग से पीड़ित मरीज आते है तो उन्हें सिवान सदर अस्पताल रेफर करना पड़ता है। डॉक्टरों के तैनाती तो पर्याप्त नही ही है साथ ही अस्पताल में न ही नर्स है न ही वार्ड बॉय और न ही ड्रेसर की प्रतिनियुक्ति की गई है। जिसकी वजह से मरीजो के साथ-साथ डॉक्टरों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

अस्पताल में नही है स्थायी अकाउंटेंट :

स्वास्थ्य प्रबंधक ने अस्पताल में स्थायी अकाउंटेंट नही होने की भी बात बतायी जिससे अस्पताल के वितीय मामलों को लेकर काफी समस्या पेश आती है। स्थायी अकाउंटेंट नही होने से रेफरल अस्पताल रघुनाथपुर में पदस्थापित अकाउंटेंट इस अस्पताल का लेखा-जोखा का कार्य देखते है जो सप्ताह के शुक्रवार और शनिवार को आते है और कभी छुट्टी पर रहने के कारण वो भी नही आ पाते है।

महिला स्वास्थ्य प्रबंधक से होता है दुर्व्यवहार :

साथ ही महिला स्वास्थ्य प्रबंधक ने आरोप लगाया कि उनके साथ अस्पताल में सहकर्मीयों द्वारा चिकित्सा पदाधिकारी के सामने ही दुर्व्यवहार भी किया जाता है लेकिन इसपर उनके द्वारा कोई कार्यवाई नही की जाती है। हालांकि डॉक्टरों की समस्या से सिवान के सिविल सर्जन और डीपीएम से अस्पताल प्रबंधन ने कई बार अवगत कराया है लेकिन आजतक इसकी सुध लेने की किसी ने जहमत नही दिखाई।

पुष्पा, स्वास्थ्य प्रबंधक

अब सवाल यह उठता है कि इतने बड़े अस्पताल में एक प्रसूति रोग विशेषज्ञ भी तैनात नहीं है तो ग्रामीण क्षेत्र से प्रसव कराने आने वाली महिलाओं का प्रसव कैसे होता है यह सोचने वाली बात है! विकास के मॉडल के बात करने वाले उन नेताओं और सरकारी तंत्र को भी इस पर ध्यान देना चाहिए की केवल इमारतें बना देने से लोगों को धरातल पर सुविधाएं मिलनी शुरू नहीं हो जाती लेकिन ल इसके लिए एक सुचारू और सुदृढ़ व्यवस्थाओं का होना भी नितांत आवश्यक है!

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