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11 शहरों से आने वाले प्रवासी ही रहेंगे क्वॉरेंटाइन सेंटरो पर, जानिए कौन है वो शहर?

अमित/सिवान : करोना महामारी के बीच दूसरों प्रदेशों से लौट रहे प्रवासी मजदूरों को बिहार में बने क्वारेन्टीन सेंटरों में रखा जा रहा है। लगातार आ रहे प्रवासी मजदूरों को रखने में सरकारी महकमे के सामने दिक्कतें पेश आ रही है। ऐसे में आपदा प्रबंधन विभाग ने देश के 11 बड़े शहरों से आने वाले प्रवासी मजदूरों को ही क्वॉरेंटाइन सेंटरों में रखने का निर्णय लिया है। जिसमें सूरत, अहमदाबाद, मुंबई, पुणे, दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम, नोएडा, कोलकाता और बेंगलुरु शहर शामिल हैं। यह वैसे शहर है जहां अभी कोरोना का हॉटस्पॉट बना हुआ है और यह सभी क्षेत्र रेड जोन के अंतर्गत आते हैं। वैसे जिलों के डीएम अपनी तरफ से देश के बाकी शहरों से आने वाले प्रवासियों को भी अपने हिसाब से क्वॉरेंटाइन कर सकते हैं।

इन शहरों को छोड़कर बाकी शहरों से आने वाले लोगों को प्रखंड मुख्यालय में रजिस्ट्रेशन करने के बाद घर भेज दिया जाएगा। सरकार के इस आदेश पर जिलाधिकारी और जिला प्रशासन को अविलंब अमल करने का आदेश दिया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने शुक्रवार को इस बाबत सभी डीएम और एसपी को पत्र भेजा है इसमें कहा गया है कि 21 मई को मुख्य सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हुई इसमें रेंडम सैंपल टेस्टिंग के आए परिणाम की समीक्षा की गई जिसमें पाया गया कि देश के कुछ ही शहर है। जहां प्रवासियों में कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आ रहे हैं। इसी के आलोक मे प्रवासियों की दो श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी एक में मुंबई, दिल्ली सहित देश के 11 संवेदनशील शहरों को शामिल किया गया है। इन शहरों से आने वाले प्रवासियों को प्रखंड स्तरीय क्वॉरेंटाइन कैंपों में रखा जाएगा। अगर प्रखंड में जगह की कमी हुई तो मुख्यालय से सटी पंचायत के भवनों में 14 दिनों तक क्वॉरेंटाइन किया जाएगा। 14 दिन के बाद कोरोना के लक्षण नहीं मिला तो उन्हें घर भेज दिया जाएगा लेकिन अगले 7 दिनों तक वे होम कोरेंटिंन में रहेंगे। अगर किसी में कोरोना का लक्षण पाया गया तो वैसे प्रवासियों का उपचार तुरंत किया जाएगा।

श्रेणी दो में 11 शहरों को छोड़कर देश के बाकी शहरों से आने वाले प्रवासियों को रखा गया है। ऐसे शहरों से आने वाले प्रवासियों का प्रखंड मुख्यालय में पंजीकरण होगा बैंक खाता आधार संख्या सहित पूरी जानकारी ली जाएगी ताकि उन्हें सरकार द्वारा दिए जाने वाले रेल किराया और ₹500 कम से कम ₹1000 दिए जा सके। अगर पंजीकरण के दौरान स्क्रीनिंग में किसी में कोरोना का लक्षण पाया जाए तो उन्हें रोक लिया जाएगा।

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