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दिनकर फूल नहीं, आग के कवि थे : श्रीकांत सिंह

अमित/सिवान : दिनकर निस्संदेह भारतीय जीवन की तेजस्विता के प्रतिनिधि महाकवि थे। यद्यपि उन्होंने काव्य एवं गद्य साहित्य में जीवन की कोमलता को भी समर्थ अभिव्यक्ति दी है पर दिनकर के वयक्तित्व का विस्फोट उनकी तेज बरसाने वाली कविताओं में ही हुआ है। दिनकर फूल नहीं, आग के कवि थे। वे छाह नहीं, धूप के कवि थे। ये बाते उनके व्यक्तित्व व कृतत्व पर प्रकाश डालते हुए जन आवाज के सचिव श्रीकांत सिंह ने कही।

जन आवाज मैरवा के तत्वाधान में प्रज्ञा साइंस कोचिंग संस्थान मैरवा के सहयोग से राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 111वीं जयंती मैरवा में आयोजित की गई। समारोह की अध्यक्षता कर रहें जनार्दन सिंह ने दिनकर की जीवन व्यक्तित्व, कृतित्व और सृजन कर्म की चर्चा करते हुए कहा कि उनके समस्त साहित्य में सामान्य जन की पीड़ा के प्रति सहानुभूति और उसकी आकांक्षाओं को व्यक्त किया गया है। अनुराग दुबे,अभिषेक शर्मा,धनेश,रितु और रेणु उनके जीवन पर प्रकाश डाला और उनकी रचनाए पढ़ी।


उनकी ओज की कविताओं ने समारोह में उपस्थित लोगों को काफी उत्साहित किया। अनुराग दुबे द्वारा ‘जनतंत्र का जन्म’ कविता का वाचन करते समय तालियों की गड़गड़ाहट रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। इस अवसर पर धीरज, वारिश, श्वेता आलोक, पलक, अश्विनी साक्षी, प्रिया और सैकड़ों की संख्या में साहित्यानुरागी प्रेमी उपस्थित रहे।

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