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संसद नें नहीं सुनी बात तो अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में उठा दिया जातिगत आरक्षण व SC/ST एक्ट के ख़िलाफ़ मुद्दा

स्विज़रलैंड (जिनेवा) : आरक्षण पर विरोध कोई नई किस्म की लॉन्चिंग नहीं है बल्कि यह अब तो एक लंबी पारी खेलने वाला मामला बन चुका है। लेकिन जब से संसद द्वारा एससी-एसटी एक्ट का संशोधन हुआ है उसके बाद से आरक्षण के विरोध पर एससी एसटी एक्ट ने आग में घी डालने का काम ही किया है। इसके विरोध में पिछले माह में यानी 6 सितंबर को सवर्ण समाज के संगठनों ने सोशल मीडिया के द्वारा ही देेेश व्यापी बंद बुलाया था जिसके समर्थन में ना कोई पार्टी आई थी ना कोई नेता।

जातिगत आरक्षण व एससी एसटी एक्ट को लेकर चुनावी राज्य मध्यप्रदेश व राजस्थान में सबसे ज्यादा बवाल मचा हुआ है लेकिन इसी कड़ी में एक नई खबर भी आई है। यह खबर है कि उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के जनाब त्रिभुवन शर्मा जो कि भारतीय राष्ट्रवादी समानता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने आरक्षण के मामले को सात समंदर जाकर स्विट्जरलैंड स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दफ्तर में पुरे जोर शोर से उठाया है।

इसके अलावा उन्होंने एससी एसटी एक्ट, प्रमोशन में आरक्षण व लोक सभा व राज्यसभा में आरक्षण के मुद्दे को भी उठाया है। वैसे ये खबर किसी मेन स्ट्रीम मीडिया में नहीं आई पर उन्होंने अपनी यह बातें खुद के फेसबुक प्रोफाइल के द्वारा ही साझा की है।

जिसमें उन्होंने स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दफ्तर की कुछ झलकियां भी साझा की थी। इसके अलावा देश में जातीय आधार पर लिए गए फैंसलों जिसमें एससी एसटी समुदाय के बच्चों को सस्ते में भोजन जैसे अन्य जातीय आधारित नीतियों को मुद्दा बनाकर इन मामले को बड़ी प्रमुखता से सामने रखा है । इसके साथ उन्होंने आरक्षण पर देश में नामी गिरामी नेताओं के बयानों का भी उल्लेख किया है।

खैर इन सब को अलग करके देखा जाए तो एक बात तो निश्चित है कि जहां-जहां भी आरक्षण का विरोध हो रहा है उनके लिए ऐसी खबर एनर्जी बूस्टर का काम करेगी। जैसा कि सोशल मीडिया द्वारा साझा किए गए इस पोस्ट पर सैकड़ों लोगों ने अपना समर्थन जताया था और उनके इस काम की खूब सराहना भी की है। हालांकि आगे इस खबर पर नजर रखनी होगी कि आयोग इस मामले पर किस तरह से अपना रुख अपनाता है ?

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