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मोदी सरकार कर सकती है बड़ा फैसला, 34 साल बाद फिर लागू हो सकता है पैतृक संपत्ति पर कर

इस बार बजट में मोदी सरकार बड़ा फैसला ले सकती है। सरकार निवेश को बढ़ाने के लिए पैतृक संपत्ति पर कर लगा सकती है। इस कर को एस्टेट ड्यूटी या इन्हेरिंटेंस टैक्स भी कहा जाता है। सरकार ने यह फैसला निवेश के लिए जरूरी संसाधनों को बढ़ाने के लिए किया है। इस टैक्स से सामाजिक विषमता घटने की भी बात कही जाती है। इन्हेरिटेंस टैक्स को 1985 में खत्म कर दिया गया था।

इन्हेरिंटेंस कर या एस्टेट ड्यूटी कर को पैतृक संपत्ति पर लिया जाता है। इसे 1953 में पहली बार भारत में लागू किया गया और ये करीब 32 साल देश में लागू रहा। दरअसल इस टैक्स को लेकर कोर्ट में काफी अपील डाली गई थी, जिससे इसे 1985 में खत्म कर दिया गया।

वित्त मंत्रालय द्वारा जून महीने के जीएसटी कलेक्शन की जानकारी सार्वजनिक कर दी है। इस वित्त वर्ष में पहली बार किसी महीने का जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ से कम रह गया। जून में कुल जीएसटी कलैक्शन 99, 939 करोड़ रुपये रहा। मई में जीएसटी कलेक्शन 1,00,289 करोड़ रुपये और अप्रैल में 1,13,865 करोड़ रुपये रहा था। वित्त मंत्रालय द्वारा ट्वीट करके जून महीने के जीएसटी कलेक्शन की जानकारी दी गई।

वित्त मंत्रालय ने ट्वीट किया कि जून, 2019 में कुल सकल जीएसटी राजस्व 99,939 करोड़ रुपये रहा, जिसमें सीजीएसटी 18,366 करोड़ रुपये, एसजीएसटी 25,343 करोड़ रुपये, आईजीएसटी 47,772 करोड़ रुपये (आयात पर एकत्र 21,980 करोड़ रुपये सहित) और उपकर 8,457 करोड़ रुपये हैं। सरकार को अपने राजकोषीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए और राज्यों के नुकसान की भरपाई करने के लिए हर महीने जीएसटी से एक लाख करोड़ से अधिक के कलेक्शन की आवश्यकता है।

वित्त मंत्रालय ने ट्वीट किया कि जून, 2019 में कुल सकल जीएसटी राजस्व 99,939 करोड़ रुपये रहा, जिसमें सीजीएसटी 18,366 करोड़ रुपये, एसजीएसटी 25,343 करोड़ रुपये, आईजीएसटी 47,772 करोड़ रुपये (आयात पर एकत्र 21,980 करोड़ रुपये सहित) और उपकर 8,457 करोड़ रुपये हैं। सरकार को अपने राजकोषीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए और राज्यों के नुकसान की भरपाई करने के लिए हर महीने जीएसटी से एक लाख करोड़ से अधिक के कलेक्शन की आवश्यकता है।

अपनी आखिरी बैठक में, जीएसटी परिषद ने सुधारों की एक बड़ी घोषणा की है जिसके अंतर्गत जीएसटी परिषद ने जीएसटी नियमों के सरल बनाने, जीएसटी दरों में कटौती करने और अन्य वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाने जैसे बड़े फैसले शामिल हैं।

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