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SHIVADI एकेडमी में विश्व संगीत दिवस पर प्रज्ञा ने अपने गायन से सभी को किया मंत्रमुग्ध।

राहुल यादव: जिस तरह 21 जून को विश्‍व योगा दिवस मानाया जाता है ठीक उसी प्रकार 21 जून को विश्व संगीत दिवस भी मनाया मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष 21 जून को विश्व संगीत दिवस मनाया जाता है। इसको मनाने का उद्देश्य अलग-अलग तरीके से म्यूज़िक का प्रोपेगेंडा तैयार करने के अलावा एक्सपर्ट व नए कलाकारों को एक मंच पर लाना है।

इसी कड़ी में सिवान के महादेवा रोड स्थित सांस्कृतिक संस्था शिवादि-क्लासिक सेंटर ऑफ आर्ट एन्ड म्यूजिक के तत्वाधान में “विश्व संगीत दिवस” मनाया गय़ा। इस कार्यक्रम का उद्घाटन चर्चित तबला वादक श्री विनय सिंह ने दीप प्रज्जवलित कर किया।

इस अवसर पर श्री विनय सिंह ने कहा कि संगीत आत्मा की अभिव्यक्त है। संगीत आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। संस्था की निदेशिका आदित्या ने कहा कि सन 1982 में 21 जून को पहली बार फ्रांस में विश्व संगीत दिवस की शुरुआत हुई। आज़ के दिन सार्वजनिक अथवा निजी जगहों पर कलाकारों द्वारा संगीत की निःशुल्क प्रस्तुति देने की परम्परा है। कई देशों में आज़ के दिन विश्व संगीत दिवस मनाया जाता है।

अपने गायन की प्रस्तुति करती प्रज्ञा

इस कार्यक्रम का शुभारंभ सुश्री प्रज्ञा द्विवेदी उर्फ छवि के गायन से हुआ। प्रज्ञा ने अपने मधुर संगीत से वहां मौजूद सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रज्ञा ने राग की प्रस्तुति के साथ-साथ दादरा प्रस्तुत कर समा बाँधा तो वहीं इसके पश्चात कथक नृत्यांगना सुश्री रश्मि श्रीवास्तव ने तीन ताल में उपज, ठाट, आमद, परन, तिहाई, गत निकास व लरी की प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। कलाकारों का स्वागत संस्था की संरक्षक शिक्षिका श्रीमती संगीता सिन्हा ने पुष्पगुच्छ प्रदान कर किया। मंच संचालन और धन्यवाद ज्ञापन संस्था की निदेशिका आदित्या ने किया। इस अवसर पर कई संगीत प्रेमी उपस्थित थे।

क्यों मनाया जाता है ‘वर्ल्ड म्यूजिक डे’

आज पूरा विश्व वर्ल्ड योगा डे के साथ-साथ वर्ल्ड म्यूजिक डे भी मना रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर क्यों 21 जून को ही मनाया जाता है ‘वर्ल्ड म्यूजिक डे’ और क्या है इसकेे फायदे या यूं कहें कि क्‍यों हम सब के लिए ये दिन इतना खासियत भरा है। जानकारी हो कि वर्ल्ड म्यूजिक डे का आयोजन सबसे पहले फ्रांस में हुआ था। फ्रांस के लोगों में संगीत को लेकर एक खास लगाव देखने को मिलता है। लोगों के इसी लगाव को देखते हुए 21 जून को ‘वर्ल्ड म्यूजिक डे’ के रूप में मनाने की घोषणा की गई। इसके बाद सबसे पहला संगीत दिवस 21 जून साल 1982 में मनाया गया। इस के बाद से ही हर साल पूरी दुनिया ‘वर्ल्ड म्यूजिक डे’ मनाती आ रही है। फ्रांस में इस जलसे को ‘Fete de la Musique’ के नाम से भी जाना जाता है।

दरअसल फ्रांसीसी लोगों की संगीत के प्रति दिवानगी को देखते हुए 21 जून 1982 को आधिकारिक रूप से संगीत-दिवस की घोषणा कर दी गई। जिसके बाद पूरे विश्व में यह दिन बड़े उल्लास से मनाया जाने लगा। साल 1976 में अमेरिका के मशहूर संगीतकार जोएल कोहेन ने फ्रांस में संगीत पर आधारित एक जलसे का आयोजन किया था। जिसके बाद हर साल 21 जून को वर्ल्ड म्यूजिक डे मनाया जाता है। खास बात यह है कि यह जलसा दुनिया के एक या दो नहीं बल्कि 32 से अधिक देशों में आयोजित किया जाता है। जिसमें अलग-अलग देशों के संगीतकार अपने-अपने वाद्ययंत्रों के साथ रात भर अपने कार्यक्रम पेश करते रहते हैं। जानकारी हो कि इस मौके पर अलग-अलग देशों से आए वहां के मशहूर संगीतकार लोगों के लिए पार्क, म्यूजियम, रेलवे स्टेशन पर लोगों के लिए संगीत बजाते हैं। लोगों का मनोरंजन करने के बदले वो उनसे कोई पैसा भी नहीं लेते हैं। फ्रांस के अलावा अब इन जलसों का आयोजन अर्जेंटिना, ब्रिटेन, लक्जमबर्ग, जर्मनी, चीन, लेबनॉन, कोस्टा रिका के अलावा भारत में भी होने लगा है। माना जाता है कि संगीतकार इन जलसों के जरिए पूरी दुनिया में अमन व शांति का संदेश फैलाना चाहते हैं। धीरे धीरे इसके संगीत के महत्‍व को सारी दुनियां ने माना।

संगीत से सेहत पर पड़ता है गहरा असर

ऐसा माना जाता है कि हर ‌किसी शख्स के साथ अपने पसंद की गीत सुनने के दौरान शरीर के संवेदनशील अंगों में हरकतें होती हैं। मन झुमने लगता है, ‌दिमाग में आनंद छा जाता है, कभी ‌किसी धुन पर आंसू तक ‌निकल आते हैं। दरअसल मनोवैज्ञा‌निक भी मानते हैं ‌कि संगीत का सेहत से गहरा संबंध है। संगीतकारों का कहना है ‌कि हर राग जीवन से जुडा है और तन मन तो स्वत: रागों में खो जाते हैं। आ‌दि काल से संगीत का सेहत पर पडने वाले साकारात्मक पहलू को ही अब संगीत थैरेपी का नाम दे ‌दिया गया है। अब ‌विज्ञान के क्षेत्र में संगीत के सेहत से संबंध पर शोध हो रहे हैं। मानव पर यह संगीत का बढता प्रभाव ही है ‌कि हाल के वर्षों से 21 जून को संगीत ‌दिवस के रूप में भी मनाया जाने लगा है।

संगीत में जादू

संगीत में जादू जैसा असर है। भगवान् श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी के द्वारा मधुर तान छेड़कर तीनों लोकों को मोह लिया था। पावस की लाजवंती संध्याओं को श्वेत-श्याम मेघ मालाओं से नन्हीं-नन्हीं बूंदों का रिमझिम-रिमझिम राग सुनते ही कोयल कूक उठती हैं, पपीहे गा उठते हैं, मोर नाचने लगते हैं तथा मजीरे बोल उठते हैं, लहलहाते हुए खेतों को देखकर किसान आनंद विभोर हो जाता है और वह अनायास राग अलाप उठता है। यही वह समय होता है जबकि प्रकृति के कण-कण में संगीत की सजीवता विद्यमान होती है। इन चेतनामय घडि़यों में प्रत्येक जीवधारी पर संगीत की मादकता का व्यापक प्रभाव पड़ता है।

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