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ये है सीवान के तीन बेटे जो बॉलीवुड में मचा रहे है धूम, जानिए कौन है ये तीनो?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सतवंत सलूजा

अमित यादव : वैसे तो सीवान हमेशा से महापुरुषों और इतिहास रचने वालो की धरती रही है लेकिन आज के दौर में भी सीवान के लोगो में प्रतिभा की कमी नही देखी जाती है. आज हमने खोज निकाला है ऐसे ही तीन भाइयो की कहानी जिनका जन्म सिवान में हुआ और आज ये तीन भाइयो की त्रिमूर्ति बॉलीवुड को अपने इशारो पर नाचने का काम कर रहे है. जी हां ये तीन भाई है सतवंत सलूजा(करण सलूजा), किट्टू सलूजा और बल्लू सलूजा. इनकी जिंदगी की कहानी भी किसी हिन्दी फिल्म से कम नहीं है. कहानी जानने से पहले हम आपको बता दे की ये कैसे बॉलीवुड को नचा रहे है अपने इशारो पर.

कलाकारों के साथ सतवंत सलूजा

तीनो भाइयो में सबसे बड़े भाई सलवंत सलूजा उर्फ़ करण सलूजा मायानगरी मुम्बई में करण सलूजा फिल्म्स एंड टीवी प्रोडक्शन में फिल्ममेकर और प्रोग्रामिंग और प्रोडक्शन के मार्किट स्पेशलिस्ट है. इन्होंने लास्करा टीवी, गुर्जरी टीवी, आर्या डिजिटल जैसे ब्रांड्स का summary designing, प्रोग्रामिंग और मार्केटिंग स्ट्रेटेजी को सफलतापूर्वक पूरा किया है.

दूसरे भाई किट्टू सलूजा

वही दूसरा भाई किट्टू सलूजा बॉलीवुड में जानामाना नाम है जिन्होंने अभी तक कई बड़ी फिल्मो का निर्देशन और सहायक निर्देशक के रूप में काम किया है. जो काफी हिट रही है. ये फिल्में है वस्सुप! ज़िन्दगी (2017), भूत एंड फ्रेंड्स(2010), चैन खुली की मैं खुली (2007) और इश्क़ विश्क(2003).

बल्लू सलूजा

वही तीसरा भाई बल्लू सलूजा ने बॉलीवुड में अपने को बड़े एडिटर के रूप में स्थापित किया है. वे एक दर्जन से ज्यादा हिट फिल्मो को एडिट कर चुके है. इनमे लगान : once upon a time in india (2001), जोधा अकबर (2008), स्वदेश (2004), दंगल (2016) सहित दर्जनों फिल्मे है.

आइए अब जानते है इनकी कहानी और क्या है इनका सिवान से नाता

ये कहानी है बिहार के छोटे से जिले सीवान के एक परिवार की जो आजादी के वक्त पाकिस्तान से भारत आया। ये वो दौर था जब मुस्लमान इंडिया से पाकिस्तान जा रहे थे और पाकिस्तान से हिन्दू और सिख भारत आ रहे थे। उन लोगों में एक परिवार था सलूजा परिवार जो पाकिस्तान से भारत आया। परिवार के मुखिया सरदार कल्याण सिंह ने इंडिया के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की जन्मभूमि सीवान में रहने का फैसला किया और वह पूरे परिवार के साथ सीवान आ गए।

सरदार कल्याण सिंह { गुरुजी }

सीवान उन दिनों अलीगंज के नाम से जाना जाता था। सरदार कल्याण सिंह सीवान की बड़ी मस्जिद के पास एक छोटी सी जमीन लेकर एक लकड़ी काटने वाली मशीन लगाकर अपना व्यवसाय करने लगे। बाद में सरदार कल्याण सिंह जी ने कपड़े का व्यवसाय शुरू किया। 1970 की दशक में सरदार कल्याण सिंह सीवान में एक बड़े व्यवसाई की भूमिका में आ गए थे। सरदार कल्याण सिंह के तीन बेटे हुए ।

किट्टू सलूजा, सतवंत सलूजा, बल्लू सलूजा

1. सतवंत सलूजा(करण सलूजा) 2. किट्टू सलूजा 3. बल्लू सलूजा सभी परिवार के साथ सिवान में ख़ुशी ख़ुशी जिंदगी बिता रहे थे फिर 1977 में लूट के इरादे से आये हथियार बंद अपराधियों ने सरदार कल्याण सिंह की गोली मार हत्या कर दी। पिता की हत्या के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके बड़े बेटे सतवंत सलूजा पर, जिनकी उम्र उस वक्त 15 साल थी आ गई। माँ के मार्गदर्शन में बड़े बेटे ने परिवार की जिम्मेदारी अपने कन्धों पर उठा ली और अपने दो छोटे भाइयों किट्टू और बल्लू को पढाई के लिए मसूरी भेज दिया। पिता की हत्या के पांच साल बाद 1982 में माँ के कहने पर बड़े बेटे सतवंत ने 20 साल की उम्र में शादी कर ली। सीवान में व्यवसाय अच्छा चल रहा था। जिंदगी एक बार फिर पटरी पर आ गई थी।

ठीक दो साल बाद 1984 में सीवान से करीब एक हजार किलो मीटर दूर दिल्ली में एक हत्या हुई जिसने सीवान के सलूजा परिवार ही नहीं बल्कि देश के कई सिख परिवारों की जिंदगी बदल दी।

1984 में भारत के तत्काली प्रधानमंत्री श्रीमती इंद्रा गांधी की हत्या के बाद पुरे भारत में सिख विरोधी देंगे भड़क गए। सीवान भी इस दंगे की आग की लपटों में आ गया। सलूजा परिवार सहित सीवान के कई सिख परिवारों की दूकाने लूट ली गई, व्यवसाय को काफी नुकसान पहुंचा।

सरदार कल्याण सिंह की पत्नी सहिन्दर कौर ने परिवार सहित सीवान छोड़ने का फैसला कर लिया। 1986 में घर, 40 दुकानों का मार्केट सहित पूरी प्रोपेर्टी बेंच परिवार पंजाब चला गया। बड़े बेटे सतवंत सलूजा को बचपन से फिल्मो का बड़ा शौख था उस ज़माने में उनके दोस्त संबंधी उन्हें सीवान का अमिताभ बुलाते थे. सीवान से जाने के बाद सतवंत मुम्बई चले गए, पढाई पूरी की और अपने साथ-साथ अपने भाइयों का भी बॉलीवुड में कैरिअर बनाया।

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