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आंइस्टीन को चुनौती देने वाले बिहार के मैथमैटीशियन डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह पर बनेगी फिल्‍म

बिहार के महान गणितज्ञ डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह की जीवन पर जल्‍द ही एक फिल्‍म बनने वाली है, जिसकी घोषणा आज पटना के होटल मौर्या स्थित बॉलीवुड ट्रीट रेस्‍तरां में आयोजित संवाददाता सम्‍मेलन में फिल्‍म की प्रोड्यूसर प्रीति सिन्‍हा, को-प्रोड्यूसर नम्रता सिन्‍हा व अमोद सिन्‍हा ने दी. उन्‍होंने बताया कि डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह बिहार के बहुत बड़े गणितज्ञ हैं. हालांकि वे अभी मानसिक बीमारी सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित हैं, मगर वे ऐसे शख्सियत हैं, जिन्‍होंने आंइस्टीन के सापेक्ष सिद्धांत को चुनौती दी थी. उनके बारे में मशहूर है कि नासा में अपोलो की लांचिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गए तो कंप्यूटर ठीक होने पर उनका और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक था.

फिल्म प्रकाश झा निर्देशित करेंगे
प्रीति सिन्‍हा ने कहा कि डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह की बायोपिक को लोगों को सामने आना चाहिए, ताकि लोग उन्‍हें जान सकें. इसलिए हम उनकी अनटोल्‍ड स्‍टोरी को हम बायोपिक के जरिये पर्दे पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए हमने उनके परिवार से राइट ले लिया है और उनकी बायोपिक को बिहार के ही जाने माने निर्देशक प्रकाश झा निर्देशित करेंगे. ये उन्‍होंने कंफर्म कर दिया है. फिलहाल हम इसके कास्टिंग पर काम कर रहे हैं, जिसकी घोषणा भी हम आर्टिस्‍ट के कंफर्मेशन के बाद करेंगे. उनकी बायोपिक का निर्माण रील लाइफ इंटरटेंमेंट विनय पिक्‍चर्स के साथ मिल कर करेगी.

फिल्‍म का मुहूर्त बिहार में ही

बता दें कि प्रोड्यूसर प्रीति सिन्‍हा, को-प्रोड्यूसर नम्रता सिन्‍हा व अमोद सिन्‍हा के पिता विनय कुमार सिन्‍हा हैं, जो सलमान खान और आमिर खान स्‍टारर ब्‍लॉक बस्‍टर फिल्‍म‘अंदाज अपना अपना’ को प्रोड्यूस किया था. विनय कुमार सिन्‍हा गणितज्ञ डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह की बायोपिक में भी शामिल हैं. बिहार में शूटिंग के सवाल पर प्रीति ने कहा कि ये प्रकाश झा तय करेंगे. उन्‍हें फिल्‍म का कंसेप्‍ट पसंद आया है, इसलिए उन्‍होंने हमें हामी भरी है. फिल्‍म का मुहूर्त हम बिहार में ही करेंगे.

एक नजर में डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह
डॉ. वशिष्ठ बिहार के आरा स्थित बेहद पिछड़े वसंतपुर गांव में गरीब परिवार में जन्मे.
नेतरहाट विद्यालय से मैट्रिक किया. संयुक्त बिहार में टॉपर रहे.

पटना साइंस कॉलेज में पढ़ाई के दौरान कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के गणितज्ञ प्रो. जॉन एल केली ने उनकी प्रतिभा पहचानी.
प्रो. केली उन्हें उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका ले गए. वहां साइकिल वेक्टर स्पेश थ्योरी पर पीएचडी की और वाशिंगटन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर बने.
नासा में काम करने का मौका मिला. अमेरिकी सरकार ने रोका तो भारत लौटे.

आईआईटी कानपुर, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और भारतीय सांख्यिकी संस्थान जैसे प्रसिद्ध संस्थानों में काम किया.

फिलहाल 35 साल से सिजोफ्रेनिया नाम की मानसिक बीमारी हुई. लंबी बीमारी से परेशान पत्नी ने साथ छोड़ा.

वर्तमान में बेहद गरीबी में जीवन जी रहे हैं, परिजन इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं.

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