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अंतरराष्ट्रीय माहिला दिवस पर शर्मसार हुआ बिहार

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है. महिला दिवस को लेकर विश्व भर में कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है लेकिन हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी बता रहे हैं जिसकी बदनसीबी ने मौत के बाद भी उसका पीछा नहीं छोड़ा.

शवके साथ परिजन

बिहार के मुजफ्फरपुर में सरकारी सिस्टम की लापरवाही से मृतका श्यामा देवी के शव को घर ले जाने के लिए एक गाड़ी तक नसीब नहीं हुई. सदर अस्पताल के अधिकारियों के गुहार लगा कर थक चुके परिजन कंधे पर ही शव को लेकर अस्पताल से निकल पड़े.

रास्ते में एक ऑटो चालक को उन पर दया आयी तो उसने महिला का शव घर तक पहुंचा दिया. घटना मंगलवार रात की है. इस घटना ने एक बार फिर से उजागर कर दिया कि सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को जांच और दवाओं के साथ-साथ डेड बॉडी तक ले जाने का प्रबंध खुद करना पड़ता है.

शिवपुरी निवासी सुरेश मंडल नें अपनी पत्नी श्यामा देवी को बीमारी के इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया था. सदर अस्पताल श्यामा देवी की जिन्दगी तो बचा नहीं सका उपर से उनके शव को घर ले जाने के लिए एक गाड़ी तक इस गरीब परिवार को मुहैया नहीं हुआ.

शाम सात बजे उसकी मौत हो गई. शव को ले जाने की बात हुई तो निजी गाड़ी के लिए पैसे नहीं थे. अस्पताल प्रबंधक और डॉक्टर से एम्बुलेंस की मांग की गई, लेकिन सदर अस्पताल प्रबंधन ने एम्बुलेंस नहीं दिया. इसके बाद मृतका के भतीजे की मदद से शव को परिजनों ने चादर में लपेटा और उठा कर पैदल ही बाहर निकल गए.

 

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