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दरौदा :रैक कोच का इंजन पटरी से उतरा

सिवान : दारौंदा जंक्शन के पश्चिमी रेलवे फाटक के समीप रैक कोच का इंजन शनिवार की रात 2.40 बजे पटरी से उतर  गया.     घटना के संबंध में बताया जाता है कि दारौंदा रेलवे जंक्शन पर रात में रैक कोच को प्लेटफार्म संख्या दो पर खड़ा किया गया था. यह डाउन लाइन है.

उसी समय प्लेटफार्म संख्या एक अप लाइन पर भी एक रैक कोच को ही खड़ा किया गया था.  प्लेटफार्म संख्या एक पर अप दिशा में जाने वाले रैक कोच को आगे बढ़ने के लाइन क्लीयर कर सिग्नल दिया गया. यह गाड़ी आगे बढ़ने लगी. उसी समय प्लेटफार्म संख्या दो पर डाउन दिशा में जाने वाले रैक कोच को भी उसके चालक ने आगे बढ़ाना शुरू कर दिया. बताया गया कि चालक को गलतफहमी हो गई कि उसके लिए भी लाइन को क्लीयर कर दिया गया है. गाड़ी आगे बढ़ाने के लिए गार्ड ने भी सहमति दे दी. जबकि न सिग्नल मिला और न ही आगे स्थित रेलवे फाटक संख्या 78/ बी को बंद किया गया. गाड़ी आगे बढ़ी तो रेलवे पैड न बदले जाने के कारण सीधे ब्रेकर से टकरा गई. पैड से करीब 90 मीटर दूर जाकर इंजन पटरी से उतर गया. गाड़ी के चालक अभिषेक कुमार एवं अरविंद कुमार थे.गार्ड सुनील रंजन थे. रेलवे के अधिकारियों ने तुरंत चालकों की मेडिकल जांच कराई. इन लोगों ने बिना सिग्नल के जिस तरह से गाड़ी को आगे बढ़ाया, खुल रेलवे फाटक के कारण बड़ी दुर्घटना भी हो सकती थी.  इस दौरान रेलवे फाटक कर्मी प्रेम कुमार यादव ने बिना सूचना गाड़ी को आते देख झंडी लेकर रोकने का प्रयास किया, परंतु गाड़ी तबतक आगे बढ़ गई थी. घटना की सूचना दारौंदा जंक्शन के सहायक स्टेशन अधीक्षक राजीव कुमार को दी गई. इस दौरान दारौंदा-महाराजगंज मुख्य सड़क पर स्थित गेट 78/बी रैक कोच के डिब्बों से जाम हो गया.  इसके चलते रेलवे फाटक को करीब डेढ़ घंटे तक बंद रखा गया. इस दौरान आने-जाने वालों लोगों को काफी परेशानियों से जूझना पड़ा. कुछ देर बाद किसी तरह से डिब्बों को हटाकर फाटक को खोलवाया गया.

घटना की सूचना मिलने पर रेलवे के छपरा क्षेत्रीय प्रबंधक देवानंद यादव, आरपीएफ इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिन्हा आदि पदाधिकारी यहां पहुंच कर जांच में जुट गए हैं. बेपटरी इंजन को हटाने के लिए बिजली के दो तार की सप्लाई बंद कर दी गई. इलेक्ट्रिक इंजन आने-जाने के लिए एक तार में सप्लाई चालू रखी गई है.  गोरखपुर से क्रेन मंगाकर इंजन को उठाकर पटरी पर रखवाने का प्रयास किया जा रहा है.

अपनी गलती मानने को कोई तैयार नहीं, एक-दूसरे पर पर मढ़ रहे दोष
सरकार जहां रेल सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए नई तकनीक  विकसित कर लोगों में रेलवे के प्रति विश्वास बढ़ाने में लगी है, वहीं रविवार की अहले सुबह दारौंदा में रैक कोच गाड़ी का इंजन पटरी से उतरने से तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं. यह तो संयोग ही था कि रेलवे फाटक से उस समय कोई वाहन नहीं गुजरा, नहीं तो वह जरूर इसकी चपेट में आ जाता. इसका दूसरा पहलू यह है कि इसके लिए कोई अपनी गलती भी मानने को तैयार नहीं है. सहायक स्टेशन मास्टर राजीव कुमार ने इंजन के पटरी से उतरने की घटना को लेकर कहा कि  जब लाइन क्लीयर करते तो रेलवे फाटक बंद रहता, सिग्नल की बत्ती पीली या हरी जलती,  पैड भी क्लीयर होता . परंतु ऐसा कुछ भी नहीं था . फिर भी चालक ने गाड़ी को बढ़ा दिया . इसके चलते इंजन से पटरी उतरा. गाड़ी चालक अभिषेक कुमार एवं अरविंद कुमार भी अपनी गलती नहीं मान रहे हैं.

वे स्टेशन की व्यवस्था की जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. कहा कि वॉकी टॉकी से सूचना मिली कि गाड़ी चलाएं, तभी चलाया . गार्ड सुनील रंजन कहना था कि चालक ने बताया कि लाइन क्लीयर हो गई है, तब गाड़ी चलाने को कहा. हालांकि उच्चाधिकारी इस मामले की जांच में जुट गए हैं. दुर्घटना स्थल से कितनी दूरी पर पैड है, उस समय किस परिस्थिति में गाड़ी को चलाया गया. इन सभी सवालों का जवाब ढूंढा जा रहा है. रेलवे फाटक कर्मी प्रेम कुमार यादव ने बताया कि लाइन क्लीयर नहीं थी. अगर लाइन क्लीयर होती तो  फाटक बंद रहता. जब गाड़ी नजदीक आई तो उसे रोकने का प्रयास किया, परंतु कोई फायदा नहीं हुआ. दुर्घटना का जायजा ले रहे छपरा के क्षेत्रीय प्रबंधक देवानंद यादव ने बताया कि दुर्घटना के सभी बिंदुओं पर गहन जांच चल रही है. चालकों, गार्ड, दारौंदा स्टेशन के सहायक स्टेशन मास्टर एवं रेलवे फाटक पर तैनात कर्मी से लिखित जानकारी ली गई है. घटना की जांच के बाद दोषी पर कार्रवाई होगी.

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